भारतीय लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया

भारतीय लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया

भारतीय लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया

भारतीय लोकतंत्र विश्‍व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था है। यहां देश में शासन व्‍यवस्‍था के संचालन हेतु एक केंद्रीयकृत व्‍यवस्‍था के रूप में संसद जिसके अंतर्गत लोकसभा तथा राज्‍यसभा एवम् पृथक-पृथक राज्यों के लिए अलग विधानसभा का प्रावधान है। राज्‍यसभा उच्‍च सदन एवम् स्‍थायी सदन है जबकि लोकसभा की अधिकतम अवधि 5 वर्षों की होती है।  सदस्‍यों के चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग की व्‍यवस्‍था की गई है। 

भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए गया था। भारतीय चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी।

भारत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त एवं अर्ध-न्यायिक संस्थान है जिसका गठन भारत में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से विभिन्न से भारत के प्रातिनिधिक संस्थानों में प्रतिनिधि चुनने के लिए गया था। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को की गयी थी।

आयोग में वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। 15 अक्टूबर, 1989 तक केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित यह एक एकल-सदस्यीय निकाय था। 16 अक्टूबर, 1989 से 1 जनवरी, 1990 तक यह आर. वी. एस. शास्त्री (मु.नि.आ.) और निर्वाचन आयुक्त के रूप में एस.एस. धनोवा और वी.एस. सहगल सहित तीन-सदस्यीय निकाय बन गया। 2 जनवरी, 1990 से 30 सितम्बर, 1993 तक यह एक एकल-सदस्यीय निकाय बना रहा और फिर 1 अक्टूबर, 1993 से यह तीन-सदस्यीय निकाय बन गया।

भारत के मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त
  1. सुकुमार सेन : 21 मार्च 1950 - 19 दिसम्बर 1958
  2. के. वी. के. सुंदरम : 20 दिसम्बर 1958- 30 सितंबर 1967
  3. एस. पी. सेन वर्मा : 1 अक्टूबर 1967 - 30 सितंबर 1972
  4. डॉ॰ नगेन्द्र सिँह : 1 अक्टूबर 1972 - 6 फ़रवरी 1973
  5. टी. स्वामीनाथन : 7 फ़रवरी 1973 - 17 जून 1977
  6. एस. एल. शकधर : 18 जून 1977 - 17 जून 1982
  7. आर. के. त्रिवेदी : 18 जून 1982 - 31 दिसम्बर 1985
  8. आर. वी. एस शास्त्री : 1 जनवरी 1986 - 25 नवम्बर 1990
  9. वी. एस. रमादेवी : 26 नवम्बर 1990 - 11 दिसम्बर 1990
  10. टी. एन. शेषन : 12 दिसम्बर 1990 - 11 दिसम्बर 1996
  11. एम. एस. गिल : 12 दिसम्बर 1996 - 13 जून 2001
  12. जे. एम. लिंगदोह : 14 जून 2001 - 7 फ़रवरी 2004
  13. टी. एस. कृष्णमूर्ति : 8 फ़रवरी 2004 - 15 मई 2005
  14. बी. बी. टंडन : 16 मई 2005 - 28 जून 2006
  15. एन गोपालस्वामी : 29 जून 2006 - 20 अप्रैल 2009
  16. नवीन चावला : 21 अप्रैल 2009 - 29 जुलाई 2010
  17. शाहबुद्दीन याकूब कुरैशी : 30 जुलाई 2010 - 10 जून 2012
  18. वी. एस. संपत : 11 जून 2012 - 15 जनवरी 2015
  19. एच॰ एस॰ ब्रह्मा : 16 जनवरी 2015 - 18 अप्रैल 2015
  20. नसीम जैदी : 19 अप्रैल 2015 - 5 जुलाई 2017
  21. अचल कुमार ज्योति : 6 जुलाई 2017 - 22 जनवरी 2018
  22. ओम प्रकाश रावत : 23 जनवरी 2018 - 1 दिसम्बर 2018
  23. सुनील अरोड़ा : 2 दिसंबर 2018 - अक्तूबर 2021


भारतीय संविधान के भाग 15 में अनुच्छेद 324 से अनुच्छेद 329 तक निर्वाचन प्रक्रिया की व्याख्या की गई है। 

निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयानुसार अनु 324 मे निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ कार्यपालिका द्वारा नियंत्रित नहीं हो सकती उसकी शक्तियां केवल उन निर्वाचन संबंधी संवैधानिक उपायों तथा संसद निर्मित निर्वाचन विधि से नियंत्रित होती है।  निर्वाचन का पर्यवेक्षण, निर्देशन, नियंत्रण तथा आयोजन करवाने की शक्ति मे देश मे मुक्त तथा निष्पक्ष चुनाव आयोजित करवाना भी निहित है जहां कही संसद विधि निर्वाचन के संबंध मे मौन है वहां निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिये निर्वाचन आयोग असीमित शक्ति रखता है यद्यपि प्राकृतिक न्याय, विधि का शासन तथा उसके द्वारा शक्ति का सदुपयोग होना चाहिए।  
निर्वाचन आयोग विधायिका निर्मित विधि का उल्लंंघन नहीं कर सकता है और न ही स्वेच्छापूर्ण कार्य कर सकता है उसके निर्णय न्यायिक पुनरीक्षण के पात्र होते है।
निर्वाचन आयोग की शक्तियाँ निर्वाचन विधियों की पूरक है न कि उन पर प्रभावी तथा वैध प्रक्रिया से बनी विधि के विरूद्ध प्रयोग नही की जा सकती है। 
यह आयोग चुनाव का कार्यक्रम निर्धारित कर सकता है चुनाव चिन्ह आवंटित करने तथा निष्पक्ष चुनाव करवाने के निर्देश देने की शक्ति रखता है।  
सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी शक्तियों की व्याख्या करते हुए कहा कि वह एकमात्र अधिकरण है जो चुनाव कार्यक्रम निर्धारित करे चुनाव करवाना केवल उसी का कार्य है 
जनप्रतिनिधित्व एक्ट 1951 के अनु 14, 15 भी राष्ट्रपति, राज्यपाल को निर्वाचन अधिसूचना जारी करने का अधिकार निर्वाचन आयोग की सलाह के अनुरूप ही देते है

लोकसभा की कुल 543 सीटों में से विभिन्न राज्यों से अलग-अलग संख्या में प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इसी प्रकार अलग-अलग राज्यों की विधानसभाओं के लिए अलग-अलग संख्या में विधायक चुने जाते हैं। नगरीय निकाय चुनावों का प्रबंध राज्य निर्वाचन आयोग करता है, जबकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में होते हैं, जिनमें वयस्क मताधिकार प्राप्त मतदाता प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से सांसद एवं विधायक चुनते हैं। लोकसभा तथा विधानसभा दोनों का ही कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। इनके चुनाव के लिए सबसे पहले निर्वाचन आयोग अधिसूचना जारी करता है। अधिसूचना जारी होने के बाद संपूर्ण निर्वाचन प्रक्रिया तीन चरणों में सम्‍पन्‍न की जाती है- नामांकन, निर्वाचन तथा मतगणना। निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन पत्रों को दाखिल करने के लिए सात दिनों का समय मिलता है। उसके बाद एक दिन उनकी जांच पड़ताल के लिए रखा जाता है। तत्पश्चात दो दिन नाम वापसी के लिए दिए जाते है ताकि जिन्हे चुनाव नहीं लड़ना है वे आवश्यक विचार विनिमय के बाद अपने नामांकन पत्र वापस ले सकें। 1993 के विधानसभा चुनावों तथा 1996 के लोकसभा चुनावों के लिए विशिष्ट कारणों से चार-चार दिनों का समय दिया गया था। परंतु सामान्यत: यह कार्य दो दिनों में संपन्न करने का प्रयास किया जाता है। कभी कभार किसी क्षेत्र में पुन: मतदान की स्थिति पैदा होने पर उसके लिए अलग से दिन तय किया जाता है। मतदान के लिए तय किये गए मतदान केंद्रों में मतदान का समय सामान्यत: सुबह 7 बजे से सायं 5 बजे तक रखा जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन आने के बाद मतगणना के लिए सामान्यत: एक दिन का समय रखा जाता है। मतगणना लगातार चलती है तथा इसके लिए विशिष्ट मतगणना केंद्र तय किए जाते हैं जिसमें मतदान केंद्रों के समान ही अनाधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित रहता है। सभी प्रत्याशियों, उनके प्रतिनिधियों तथा पत्रकारों आदि के लिए निर्वाचन अधिकारियों द्वारा प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं। वर्तमान में निर्वाचन क्षेत्रानुसार मतगणना की जाती है तथा उसके लिए उसके सभी मतदान केंद्रो के मत की गणना कर परिणाम घोषित किया जाता है। परिणाम के अनुसार जिस दल को बहुमत प्राप्त होता है, वह केंद्र या राज्य में अपनी सरकार का गठन करता है। भारत में वोट डालने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है और यह नागरिकों का अधिकार है, कर्तव्य नहीं।

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